कांग्रेस के गले की ही बनते अपने ही बड़बोले नेता
April 17, 2019 • Sudesh Jain

आगामी लोकसभा चुनाव में देश में एक बार फिर से अपनी पार्टी की सरकार बनाने के सपने देख रही कांग्रेस पार्टी के सपनों को उन्हीं के कुछ बड़बोले नेता ग्रहण लगाने पर तुले हुये हैं। कांग्रेस नेताओं के बयानों से पार्टी को बार-बार बैकफुट पर आना पड़ता है। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा कई बार चेतावनी देने का भी असर उन नेताओं पर होता नहीं दिख रहा हैं। फलस्वरूप पार्टी को बार-बार अपने ही नेताओं के बयानों से किनारा करना पड़ता है।

हाल ही में कांग्रेस के सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम में कहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में जीतती है तो वह हिंदू पाकिस्तान बनने जैसे हालात पैदा करेगी। थरूर ने आगे कहा कि बीजेपी नया संविधान लिखेगी जो भारत को पाकिस्तान जैसे मुल्क में बदलने का रास्ता साफ करेगा, जहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों का कोई सम्मान नहीं होगा। थरूर ने कहा अगर बीजेपी दोबारा लोकसभा चुनाव जीतती हैं तो हमारा लोकतांत्रिक संविधान खत्म हो जाएगा क्योंकि उनके पास भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाने और एक नया संविधान लिखने वाले सारे तत्व हैं। उनका लिखा नया संविधान हिंदू राष्ट्र के सिद्धांतों पर आधारित होगा जो अल्पसंख्यकों के समानता के अधिकार को खत्म कर देगा और देश को हिंदू पाकिस्तान बना देगा।

थरूर के इस बयान का देश भर में तीव्र विरोध हो रहा है। थरूर के इस बयान से भाजपा आक्रामक हो कांग्रेस से देश से माफी मांगने को कह रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे थरूर का निजी बयान बता कर बयान से पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस ने थरूर से कहा है कि वे बयान देने से पहले सोचा करें। थरूर के बयान ने कांग्रेस को बचाव की मुद्रा में ला दिया है।

इससे कुछ दिनों पहले कांग्रेस की केन्द्र सरकार में मंत्री रहे सैफुद्दीन सोज ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक विवादित बात कही थी। सैफुद्दीन सोज ने कहा था कि सरदार वल्लभ भाई पटेल हमेशा चाहते थे कि कश्मीर का विलय पाकिस्तान में हो जाए। अपनी किताब की लांचिंग के मौके पर सैफुद्दीन सोज ने कहा कि सरदार पटेल ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को कश्मीर की पेशकश की थी।

इससे पहले 22 जून को सैफुद्दीन सोज ने कश्मीर पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के आजादी वाले विचार का समर्थन किया था। सोज ने अपनी पुस्तक कश्मीर ग्लिम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एंड द स्टोरी ऑफ स्ट्रगल में परवेज मुशर्रफ के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर के लोग भारत या पाक के साथ जाने की बजाय अकेले और आजाद रहना पसंद करेंगे। सोज के बयान से कांग्रेस की काफी किरकिरी हुयी थी।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम ने गत दिनो कहा था कि केंद्र दमनकारी नीति का सबसे ज्यादा जम्मू कश्मीर की आम जनता पड़ता है। एक आतंकी को 13 नागरिकों को मार दिया जाता कहा कि हाल के आंकड़ों पर सेना की कार्रवाई नागरिकों ज्यादा और आतंकियों के खिलाफ है। घाटी में हालात बिगड़ने यह है कि मोदी सरकार बातचीत अपेक्षा कार्रवाई करने में ज्यादा है। ऐसा लगता है कि वे हमेशा इस्तेमाल करना चाहते हैं। लश्कर-ए-तैयबा ने भी आजाद बयान के समर्थन में प्रेस रिलीज लश्कर-ए-तैयबा के प्रवक्ता गजनवी ने कहा था कि वहां नबी आजाद ने जो बात कही सही है। 

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी को लेकर विवादित बयान दिया था। कमलनाथ ने कहा था कि मैंने कहीं पढ़ा था कि भारतीय जनता पार्टी के 20 नेता ऐसे हैं जो बलात्कार से जुड़े हैं। अब इनका नाम भारतीय जनता पार्टी होना चाहिए या बलात्कार जनता पार्टी, ये जनता को सोचना है। कमलनाथ ने ट्वीट के माध्यम से भी बीजेपी पर निशाना साधा था। उन्होंने ट्वीट किया था कि भाजपा के नारों को देश की वजुभाई जनता अब यूं कहती है मेक इन इंडिया-रेप इन । इंडिया, बेटी पढT, बेटी बचाओ-बेटी छिपा अ, बलात्कारियो से बचाओ, देश बदल र है । है-बेटियों के साथ रोज रेप हो रहा है कांग्रेस नेता एवं पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने अपनी पार्टी के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव में विवादास्पद बयान दिया था। खुर्शीद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव में शामिल हुए थे, जहां एक पूर्व छात्र ने सवाल किया कि 1948 में एएमयू एक्ट में पहला संशोधन हुआ था, उसके बाद 1950 में राष्ट्रपति का आदेश, जिससे मुस्लिमों से आरक्षण को छीना गया और इसके साथ ही हाशिमपुरा, मलियाना और मुज्जफर नगर जैसे दंगों की लिस्ट है। इसके अलावा बाबरी मस्जिद की शहादत ये सब कांग्रेस के ही शासन में हुआ। मुसलमानों की मौत के धब्बे कांग्रेस के दामन पर है इन्हें आप कैसे धोएंगे? इस पर खुर्शीद ने स्वीकार करते हुए कहा कि कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि मैं कांग्रेस का नेता हूं इसलिए मुस्लिमों के खून के दाग मेरे दामन में भी हैं, लेकिन ये आप पर ना लगें इसलिए आप इन घटनाओं से सीखें। खुर्शीद के बयान पर कांग्रेस को जगह-जगह सफाई देनी पड़ी थी। 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी शीला दीक्षित के बेटे व पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी विदेशी कंपनियों के एजेंट बन गए हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने उरी हमले के बाद पाकिस्तान में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक को ड्रामा बताते हुए कहा था कि उस सर्जिकल स्ट्राइक का कुछ भी असर नहीं हुआ। मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को वफादार कुत्ता बताया था। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव पश्चात सरकार बनाने को लेकर चले घटनाक्रम में राज्यपाल पर टिप्पणी करते हुये उन्होंने कहा कि इस देश में उन्होंने वफादारी का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चुनावों से पहले विवादित बयान के लिए मशहूर कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर विवादित बयान दिए हैं। अय्यर ने पाक में मोहम्मद अली जिन्ना की शान में कसीदे पढ़े। उन्होंने बोला कि राष्ट्र के विभाजन के लिए जिन्ना जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान में इस समय दशा अच्छी नहीं है। दो देश के सिद्धांत का समर्थन करने वाले सत्ता में हैं। मणिशंकर अय्यर गत दिनों लाहौर में एक इंटरनेशनल काफ्रेंस में शिरकत करने गये थे। उन्होंने यहां तक बोला कि हिंदुस्तान में दशा सामान्य नहीं हैं। मणिशंकर अय्यर हमेशा चुनावों से पहले कुछ इस तरह का बयान देते हैं जिससे चुनावी हवा का रुख भाजपा की तरफ मुड़ जाता है। गुजरात चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया था। बिगड़े बयानों की वजह से कांग्रेस पार्टी ने मणिशंकर अय्यर को गुजरात चुनावों से पहले पार्टी से बाहर कर दिया था।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने सुप्रीमकोर्ट में 2019 के लोकसभा चुनाव तक रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद प्रकरण की सुनवाई स्थगित करने की बात कह कर कांग्रेस को शर्मसार ही किया था। कांग्रेस के अध्यक्ष बनने से पूर्व राहुल गांधी ने सेना द्वारा पाक सीमा पर की गयी सर्जिकल स्ट्राईक के वक्त मोदी पर हमला करते हुये कहा था कि प्रधानमंत्री सैनिको के खून की दलाली कर रहे हैं। 

कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है जिसने देश पर 60 साल तक शासन किया । गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र 44 सीटो तक ही सिमट कर रह गयी। अपनी करारी हार से कांग्रेस नेताओं ने सबक लेकर अपनी गलतियों को सुधारने की बजाय गलत बयान देने लगे जिससे कांग्रेस की साख आम जन में लगातार बिगड़ती जा रही है। कांग्रेस पार्टी को अपने बेतुके बयान देने वाले नेताओं पर नियंत्रण करना चाहिये। कांग्रेस को साफ छवि के उन नेताओं को आगे करना चाहिये जो अपनी मीठी बोली व साफ छवि के लिये लोगों में पसन्द किये जाते हैं। राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष बन चुके हैं ऐसे में उनको भी बहुत सोच समझ कर बोलना चाहिये ताकि आम जन में उनकी छवि अच्छी बन सके।